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03/02/2025
03/02/2025

🔰🔰 I N D I A N R U L E R S 🔰🔰

✍ गुलाम वंश

1=1193 मुहम्मद गौरी
2=1206 कुतुबुद्दीन ऐबक
3=1210 आराम शाह
4=1211 इल्तुतमिश
5=1236 रुकनुद्दीन फिरोज शाह
6=1236 रज़िया सुल्तान
7=1240 मुईज़ुद्दीन बहराम शाह
8=1242 अल्लाउदीन मसूद शाह
9=1246 नासिरुद्दीन महमूद
10=1266 गियासुदीन बल्बन
11=1286 कै खुशरो
12=1287 मुइज़ुदिन कैकुबाद
13=1290 शमुद्दीन कैमुर्स
1290 गुलाम वंश समाप्त्
(शासन काल-97 वर्ष लगभग )

✍ खिलजी वंश

1=1290 जलालुदद्दीन फ़िरोज़ खिलजी
2=1296
अल्लाउदीन खिलजी
4=1316 सहाबुद्दीन उमर शाह
5=1316 कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
6=1320 नासिरुदीन खुसरो शाह
7=1320 खिलजी वंश स्माप्त
(शासन काल-30 वर्ष लगभग )

✍ तुगलक वंश

1=1320 गयासुद्दीन तुगलक प्रथम
2=1325 मुहम्मद बिन तुगलक दूसरा
3=1351 फ़िरोज़ शाह तुगलक
4=1388 गयासुद्दीन तुगलक दूसरा
5=1389 अबु बकर शाह
6=1389 मुहम्मद तुगलक तीसरा
7=1394 सिकंदर शाह पहला
8=1394 नासिरुदीन शाह दुसरा
9=1395 नसरत शाह
10=1399 नासिरुदीन महमद शाह दूसरा दुबारा सता पर
11=1413 दोलतशाह
1414 तुगलक वंश समाप्त
(शासन काल-94वर्ष लगभग )

✍ सैय्यद वंश

1=1414 खिज्र खान
2=1421 मुइज़ुदिन मुबारक शाह दूसरा
3=1434 मुहमद शाह चौथा
4=1445 अल्लाउदीन आलम शाह
1451 सईद वंश समाप्त
(शासन काल-37वर्ष लगभग )

✍ लोदी वंश

1=1451 बहलोल लोदी
2=1489 सिकंदर लोदी दूसरा
3=1517 इब्राहिम लोदी
1526 लोदी वंश समाप्त
(शासन काल-75 वर्ष लगभग )

✍ मुगल वंश

1=1526 ज़ाहिरुदीन बाबर
2=1530 हुमायूं
1539 मुगल वंश मध्यांतर

✍ सूरी वंश

1=1539 शेर शाह सूरी
2=1545 इस्लाम शाह सूरी
3=1552 महमूद शाह सूरी
4=1553 इब्राहिम सूरी
5=1554 फिरहुज़् शाह सूरी
6=1554 मुबारक खान सूरी
7=1555 सिकंदर सूरी
सूरी वंश समाप्त,(शासन काल-16 वर्ष लगभग )

✍ मुगल वंश पुनःप्रारंभ

1=1555 हुमायू दुबारा गाद्दी पर
2=1556 जलालुदीन अकबर
3=1605 जहांगीर सलीम
4=1628 शाहजहाँ
5=1659 औरंगज़ेब
6=1707 शाह आलम पहला
7=1712 जहादर शाह
8=1713 फारूखशियर
9=1719 रईफुदु राजत
10=1719 रईफुद दौला
11=1719 नेकुशीयार
12=1719 महमूद शाह
13=1748 अहमद शाह
14=1754 आलमगीर
15=1759 शाह आलम
16=1806 अकबर शाह
17=1837 बहादुर शाह जफर
1857 मुगल वंश समाप्त
(शासन काल-315 वर्ष लगभग )

✍ ब्रिटिश राज (वाइसरॉय)

1=1858 लॉर्ड केनिंग
2=1862 लॉर्ड जेम्स ब्रूस एल्गिन
3=1864 लॉर्ड जहॉन लोरेन्श
4=1869 लॉर्ड रिचार्ड मेयो
5=1872 लॉर्ड नोर्थबुक
6=1876 लॉर्ड एडवर्ड लुटेनलॉर्ड
7=1880 लॉर्ड ज्योर्ज रिपन
8=1884 लॉर्ड डफरिन
9=1888 लॉर्ड हन्नी लैंसडोन
10=1894 लॉर्ड विक्टर ब्रूस एल्गिन
11=1899 लॉर्ड ज्योर्ज कर्झन
12=1905 लॉर्ड गिल्बर्ट मिन्टो
13=1910 लॉर्ड चार्ल्स हार्डिंज
14=1916 लॉर्ड फ्रेडरिक सेल्मसफोर्ड
15=1921 लॉर्ड रुक्स आईजेक रिडींग
16=1926 लॉर्ड एडवर्ड इरविन
17=1931 लॉर्ड फ्रिमेन वेलिंग्दन
18=1936 लॉर्ड एलेक्जंद लिन्लिथगो
19=1943 लॉर्ड आर्किबाल्ड वेवेल
20=1947 लॉर्ड माउन्टबेटन

✍आजाद भारत,प्राइम मिनिस्टर

1=1947 जवाहरलाल नेहरू
2=1964 गुलजारीलाल नंदा
3=1964 लालबहादुर शास्त्री
4=1966 गुलजारीलाल नंदा
5=1966 इन्दिरा गांधी
6=1977 मोरारजी देसाई
7=1979 चरणसिंह
8=1980 इन्दिरा गांधी
9=1984 राजीव गांधी
10=1989 विश्वनाथ प्रतापसिंह
11=1990 चंद्रशेखर
12=1991 पी.वी.नरसिंह राव
13=अटल बिहारी वाजपेयी
14=1996 ऐच.डी.देवगौड़ा
15=1997 आई.के.गुजराल
16=1998 अटल बिहारी वाजपेयी
17=2004 डॉ.मनमोहनसिंह
18=2014 से नरेन्द्र मोदी

02/02/2025

आँखों में धूल झोंकना का मुहाबरा किया होता है

02/02/2025

1.अक्ल का अंधा/अक्ल का दुश्मन - महामूर्ख होना.

02/02/2025

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*💐💐नया वसंत💐💐*

वसंत का मौसम अनिका के लिए सबसे खूबसूरत मौसम हुआ करता था। इसी मौसम में यो पहली बार राज से मिली थी। हालांकि यह रिश्ता अनिका के माता-पिता ने ही तय किया था। परंतु फिर भी अनिका की राज से मिलने के बाद जो एहसास हुआ वह बिल्कुल नया और खूबसूरत था। अनिका तब केवल 21 साल की थी और राज उसका पहला प्यार। फिर वसंत पंचमी के दिन वे दोनों विवाह के बंधन में बंध गए।

अनिका ने राज और राज के परिवार को कभी भी शिकायत का कोई मौका नहीं दिया। राज अवसर अपने काम में बहुत व्यस्त रहता था। अनिका ने राज के परिवार को जिस तरह अपनाया था। लगता ही नहीं था कि वह राज का परिवार है। सब रिश्ते नाते अनिका के अपने लगते थे। राज के माता-पिता की सेवा हो या बच्चे की परवरिश। अनिका ने सब इतनी लगन और ईमानदारी से किया था कि जिसकी मिसाल दी जा सकती थी। अनिका ने अपने जीवन के 24 वसंत राज को निस्वार्थ और सच्चा प्रेम किया।

और अब वह काफी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गई थी। राज के माता-पिता अब नहीं रहे थे। अनिका और राज का बेटा भी विदेश के अच्छे कॉलेज में पढ़ रहा था। इस बार पहली बार अनिका ने अपने लिए कुछ सोचा। वह अपनी शादी की 25वीं सालगिरह धूमधाम से मनाना चाहती थी।

वो बहुत ज्यादा उत्साहित थी। अपने प्यार के 25वें वसंत को लेकर। जैसे-जैसे वसंत पंचमी की तारीख करीब आ रही थी। अनिका की तैयारियां भी जोर शोर से चल जा रही थीं। तभी अनिका के सपनों पर ऐसा कहर टूटा जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। राज ने अनिका को कहा, 'शादी की सालगिरह मनाने की कोई आवश्यकता नहीं।

वो काफी दिनों से अनिका को बताना चाह रहा था कि वह किसी और से प्यार करता है। और अब वह उसी के साथ रहना चाहता है। और अनिका को इस बात से कोई आपत्ति ना हो तो वह इस घर में आराम से रह सकती है। अन्यथा वह जैसा चाहे।' राज ने इतने साफ शब्दों में अपनी बात कह दी अनिका को कुछ समझ ही नहीं आया कि वह क्या करे।

अनिका के लिए यह गहरे सदमे से कम नहीं था। उसे लगा उसका अब तक का सारा जीवन अर्थहीन हो गया। उसकी सारी भावनाएं अपने आप को छला हुआ महसूस कर रही थी। वो कुछ भी नहीं कह पाई और चुपचाप अपना सामान उठाकर मायके चली आई। उसे समझ नहीं आ रहा था किसी से क्या कहें?

उसके जीवन में तो वसंत की जगह पतझड़ आ गया। मां भी अब नहीं रही। पिता और छोटे भाई को यह कैसे कहेगी और मायके भी कब तक रह पाएगी। और वापस राज के पास जाना मतलब अपने आत्मसम्मान से समझौता करना। उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था। इस तरह अचानक अनिका का मायके आ जाना।

और उसके चेहरे का उड़ा रंग देखकर पिताजी ने उससे पूछ ही लिया। 'बेटा क्या बात है?' अनिका अपना दर्द कहने से खुद को रोक नहीं पाई।

पिता के सामने सारा दर्द आंसू बनकर बह गया। पिता को सुनकर बहुत धक्का लगा।

उम्र के इस पड़ाव पर यह सब तो उनकी सोच से भी परे था। उन्होंने अनिका को संभालते हुए कहा, 'बेटा में दामाद जी से बात करूंगा। वो ऐसा नहीं कर सकते।'

पर आनिका ने सोच लिया था। जहां उसके प्रेम का ऐसा तिरस्कार हुआ है। वहां वो कभी वापस नहीं जाएगी। पर रास्ता भी नजर नहीं आ रहा था। कोई दूसरा

पिछले 24 सालों से तो उसने राज के घर परिवार को संभालने के अलावा कुछ सोचा भी नहीं था।

अगले दिन वसंत पंचमी थी और अनिका के पिता ने राज को समझा-बुझाकर अनीता को वापस ले जाने के लिए बुला लिया था। परंतु अनिका का मन इस समझौते के लिए तैयार नहीं था। जैसे ही आनिका के मायके में मां सरस्वती की पूजा समाप्त हुई। राज अनिका को लेने पहुंच चुका था।

पिता ने अनिका को समझाया, 'बेटा इस उम्र में अब कहां जाओगी। समझदारी से काम लो सब ठीक हो जाएगा।'

जैसे ही अनिका राज के साथ जाने के लिए तैयार हुई, तभी अनिका को मां कहते हुए बेटे ने उसे कसकर गले लगा लिया।

दरअसल, अनिका के छोटे भाई ने फोन करके अनिका के बेटे को सब कुछ बता दिया था।

बेटे ने मां के आंसू पूछते हुए कहा, 'मां आपका प्यार, आपकी भावनाएं कभी व्यर्थ नहीं हो सकती। आपको कोई आवश्यकता नहीं है अपने आत्मसम्मान से समझौता करने की। आप मेरे साथ चलिए। में वादा करता हूं। मैं आपके जीवन में वसंत का मौसम कभी खत्म नहीं होने दूंगा।'

अनिका की आंखों में खुशी की चमक थी। उसका निश्चल प्रेम राज को चाहे समझ ना आया हो पर उसकी संतान उसके साथ खड़ी थी।

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*आप चाहे किसी भी समाज से हो, अगर आप अपने समाज के किसी उभरते हुए व्यक्तित्व से जलते हो या उसकी निंदा करते हो तो आप निश्चित रूप से उस समाज के लिए कलंक हो ।*

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
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31/01/2025

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*💐💐तीन बालक💐💐*

एक राजा थे, उन्हें पशु-पक्षियों से बहुत प्यार था। वे पशु-पक्षियों से मिलने के लिए वन में जाते थे।

हमेशा की तरह एक दिन राजा पशु-पक्षियों को देखने के लिए वन में गए। अचानक आसमान में बादल छा गए और तेज-तेज बारिश होने लगी।

बारिश होने के कारण उन्हें ठीक से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, राजा रास्ता भटक गए। रास्ता दूंढते-ढूंढते किसी तरह राजा जंगल के किनारे पहुंच ही गए।

भूख-प्यास और थकान से बेचैन राजा, एक बड़े से पेड़ के नीचे बैठ गए। तभी राजा को उधर से आते हुए तीन बालक दिखाई दिए।

राजा ने उन्हें प्यार से अपने पास बुलाया, "बच्चों यहां आओ। मेरी बात सुनो।"

तीनों बालक हंसते-खेलते राजा के पास आ गए। तब राजा बोले- मुझे बहुत भूख और प्यास लगी है, क्या मुझे भोजन और पानी मिल सकता है।"

बालक बोले, पास में ही हमारा घर है। हम अभी जाकर आपके लिए भोजन और पानी लेकर आते हैं। आप बस थोड़ा-सा इंजतार कीजिए।"

तीनों बालक दौड़कर गए और राजा के लिए भोजन और पानी ले आए।

राजा बालकों के व्यवहार से बहुत खुश हुए। और बोले, प्यारे बच्चों, तुमने मेरी भूख और प्यास मिटाई है। मैं तुम तीनों बालकों को इनाम के रूप में कुछ देना चाहता हूँ। बताओ तुम बालकों को क्या चाहिए?"

थोड़ी देर सोचने के बाद एक बालक बोला:- महाराज,क्या आप मुझे एक बड़ा सा बंगला और गाड़ी दे सकते हैं?"

राजा बोले:- हां-हां क्यों नहीं। अगर तुम्हें ये ही चाहिए तो जरूर मिलेगा।"अब तो बालक फूले न समाया।

दूसरा बालक भी उछलते हुए बोला:- "मैं बहुत गरीब हूं। मुझे धन चाहिए। जिससे मैं भी अच्छा-अच्छा खा सकूं, अच्छे-अच्छे कपड़े पहन सकूं और खूब मस्ती करूं।"

राजा मुस्कराकर बोले, "ठीक है बेटा, मैं तुम्हें बहुत सारा धन दूंगा।"
यह सुनकर दूसरा बालक भी खुशी से झूम उठा।

भला तीसरा बालक क्यों चुप रहता। वह भी बोला:- महाराज। क्या आप मेरा सपना भी पूरा करेंगे?"

मुस्कराते हुए राजा ने बोला- "क्यों नहीं, बोलो बेटा तुम्हारा क्या सपना है? क्या, तुम्हें भी धन-दौलत चाहिए?"

नहीं महाराज। मुझे धन-दौलत नहीं चाहिए। मेरा सपना है कि मैं पढ़-लिखकर विद्वान बनूं। क्या आप मेरे लिए कुछ कर सकते हैं?"

तीसरे बालक की बात सुनकर राजा बहुत खुश हुए।

राजा ने उसके पढ़ने-लिखने की उचित व्यवस्था करवा दी। वह मेहनती बालक था। वह दिन-रात लगन से पढ़ता और कक्षा में पहला स्थान प्राप्त करता। इस तरह समय बीतता गया। वह पढ़-लिखकर विद्वान बन गया। राजा ने उसे राज्य का मंत्री बना दिया। बुद्धिमान होने के कारण सभी लोग उसका आदर-सम्मान करने लगे।

उधर जिस बालक ने राजा से बंगला और गाड़ी मांगी थी। अचानक बाढ़ आने से उसका सब कुछ पानी में बह गया।

दूसरा बालक भी धन मिलने के बाद, कोई काम नहीं करता था। बस दिनभर फिजूल खर्च करके धन को उड़ता और मौज-मस्ती करता था। लेकिन रखा धन भला कब तक चलता। एक समय आया कि उसका सारा धन समाप्त हो गया। वह फिर से गरीब हो गया।

दोनों बालक उदास होकर अपने मित्र यानि मंत्री से मिलने राजा के दरबार में गए। वे दुखी होकर अपने मित्र से बोले, हमने राजा से इनाम मांगने में बहुत बड़ी भूल की। हमारा धन, बंगला, गाड़ी सब कुछ नष्ट हो गया। हमारे पास अब कुछ नहीं बचा है।"

मित्र ने समझाते हुए कहा, "किसी के भी पास धन-दौलत हमेशा नहीं रहते। धन तो आता-जाता रहता है। सिर्फ शिक्षा है जो हमेशा हमारे पास रहती है। धन से नहीं बल्कि शिक्षा से ही हम धनवान बनते हैं।"

दोनों बालकों को अपनी गलती पर बहुत पछतावा हुआ। उन्होंने तय किया कि हम भी अपने बच्चों को मेहनत और लगन से पढ़ाई करवाएँगे और अपने जीवन को सुखी बनाएंगे।

*💐शिक्षा💐*
इसी लिये कहा गया है कि, विद्याधन सबसे बड़ा धन है, इसे कोई चुरा नहीं सकता है और जितना बाँटो उतना ही अधिक बढ़ता जाता है।अपने बच्चों को सामाजिक, राजनैतिक, व्यावसायिक, धार्मिक, व नैतिक शिक्षा से परिपूर्ण करें । यही सच्चा धन है।

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31/01/2025

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*💐💐मन के भाव💐💐*

एक छोटा बच्चा था, जिसका नाम तन्विक था। बहुत ही नेक और बुद्धिमान ।
एक दिन वो मंदिर में गया। मंदिर के अन्दर सभी भक्त भगवान के मंत्र बोल रहे थे। कुछ भक्त स्तुतिगान भी कर रहे थे। कुछ भक्त संस्कृत के काफी कठिन श्लोक भी बोल रहे थे।

बच्चे ने कुछ देर यह सब देखा और उसके चहेरे पर उदासी छा गयी। क्योंकि उसे यह सब प्रार्थना और मंत्र बोलना आता नहीं था। कुछ देर वहाँ खड़ा रहा उसने अपनी आँखे बन्द की, अपने दोनों हाथ जोड़े और बार-बार "क-ख-ग-घ" बोलने लगा।

मंदिर में एक व्यक्ति ने यह देखा उसने लड़के से पूछा कि "बेटे तुम यह क्या कर रहे हो, बच्चे ने कहा भगवान की पूजा"। व्यक्ति ने कहा की "बेटे भगवान से इस तरह से प्रार्थना नहीं की जा सकती, तुम तो क-ख-ग-घ बोल रहे हो।” व्यक्ति की कोई गलती भी नहीं थी, क्योंकि उनकी तो पूजा भी रटी रटाई है

भाव का तो मिश्रण होता ही नहीं, लेकिन बच्चा मासूम है, उसके पास शब्द तो थे नहीं सो भाव से क ख ग घ ही बोलने लगा।

लड़के ने उत्तर दिया की "मुझे प्रार्थना, मंत्र, भजन नहीं आते, मुझे सिर्फ क-ख-ग-घ ही आती है। मुझे मेरे पिताजी ने घर में पढ़ाते वक्त यह बताया था कि सारे शब्द इसी क-ख-ग-घ से बनते हैं इसलिये मेरे को इतना पता है प्रार्थना, मंत्र, भजन यह सब क-ख-ग-घ से ही बनते है।

मैं दस बार क-ख-ग-घ बोल गया हूँ, और भगवान से प्रार्थना करी की हे भगवान मैं अभी छोटे से स्कूल में पढ़ता हूँ मुझे अभी यही सिखाया है।इन सब शब्दों में से अपने लिए खुद प्रार्थना, मंत्र, भजन बना लेना।

बच्चे की बात सुनकर व्यक्ति चुप हो गए। उनको अपनी भूल का एहसास हो गया ।

*💐शिक्षा💐*

मित्रों प्रार्थना हदय को साफ और निर्मल करती है। शब्दों का महत्व नहीं है भाव का महत्व है। शब्द तो हवा में तैरते रह जाते हैं मगर भाव पहुंच जाता है। दुनिया में सैकड़ों भाषाएं हैं लेकिन परमात्मा भाषा नहीं भाव जानता है।

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31/01/2025

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*💐💐मित्रता की ताकत💐💐*

एक बार की बात है कि बनगिरी के घने जंगल में एक उन्मुत्त हाथी ने भारी उत्पात मचा रखा था। वह अपनी ताकत के नशे में चूर होने के कारण किसी को कुछ नहीं समझता था। बनगिरी में ही एक पेड़ पर एक चिड़िया व चिडे का छोटा-सा सुखी संसार था। चिडिया अंडों पर बैठी नन्हें नन्हें प्यारे बच्चों के निकलने के सुनहरे सपने देखती रहती। एक दिन क्रूर हाथी गरजता, चिंघाडता पेडों को तोडता-मरोडता उसी ओर आया। देखते ही देखते उसने चिडिया के घोंसले वाला पेड भी तोड डाला। घोंसला नीचे आ गिरा, अंडे टूट गए और ऊपर से हाथी का पैर उस पर पडा। चिडिया और चिडा चीखने चिल्लाने के सिवा और कुछ न कर सके। हाथी के जाने के बाद चिडिया छाती पीट-पीटकर रोने लगी। तभी वहां कठफोठवी आई, वह चिडिया की अच्छी मित्र थी। कठफोडवी ने उनके रोने का कारण पूछा तो चिडिया ने अपनी सारी कहानी कह डाली। कठफोडवी बोली इस प्रकार गम में डूबे रहने से कुछ नहीं होगा उस हाथी को सबक सिखाने के लिए हमें कुछ करना होगा। चिडिया ने निराशा दिखाई। हम छोटे-मोटे जीव उस बलशाली हाथी से कैसे टक्कर ले सकते हैं?

कठफोडवी ने समझाया एक और एक मिलकर ग्यारह बनते हैं। हम अपनी शक्तियां जोडेंगे। कैसे, चिडिया ने पूछा। मेरा एक मित्र वींआख नामक भंवरा है, हमें उससे सलाह लेना चाहिए। चिडिया और कठफोडवी भंवरे से मिली। भंवरा गुनगुनाया, यह तो बहुत बुरा हुआ। मेरा एक मेंढक मित्र है आओ उससे सहायता मांगे।

अब तीनों उस सरोवर के किनारे पहुंचे, जहां वह मेढक रहता था। भंवरे ने सारी समस्या बताई। मेंढक भर्राये स्वर में बोला- आप लोग धैर्य से जरा यहीं मेरी प्रतीक्षा करें। मैं गहरे पानी में बैठकर सोचता हूं, ऐसा कहकर मेंढक जल में कूद गया। आधे घंटे बाद वह पानी से बाहर आया तो उसकी आंखे चमक रही थी। वह बोला दोस्तो उस हत्यारे हाथी को नष्ट करने की मेरे दिमाग में एक बड़ी अच्छी योजना आई है। उसमें सभी का योगदान होगा, मेंढक ने जैसे ही अपनी योजना बताई, सब खुशी से उछल पडे। योजना सचमुच ही अदभुत थी मेंढक ने दोबारा बारी-बारी सबको अपना-अपना रोल समझाया। कुछ ही दूर वह उन्मत्त हाथी तोडफोड मचाकर व पेट भरकर कोंपलों वाली शाखाएं खाकर मस्ती में खडा झूम रहा था। पहला काम भंवरे का था, वह हाथी के कानों के पास जाकर मधुर राग गुंजाने लगा। राग सुनकर हाथी मस्त होकर आंखें बंद करके झूमने लगा। तभी कठफोडवी ने अपना काम कर दिखाया। वह आई और अपनी सुई जैसी नुकीली चोंच से उसने तेजी से हाथी की दोनों आंखें बींध डाली। हाथी की आंखे फूट गईं। वह तडपता हुआ अंधा होकर इधर-उधर भागने लगा। जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था, हाथी का क्रोध बढता जा रहा था। आंखों से नजर न आने के कारण ठोकरों और टक्करों से शरीर जख्मी होता जा रहा था। जख्म उसे और चिल्लाने पर मजबूर कर रहे थे। चिडिया कृतज्ञ स्वर में मेढक से बोली, मैं आजीवन तुम्हारी आभारी रहूंगी। तुमने मेरी इतनी सहायता कर दी।

मेढक ने कहा आभार मानने की जरुरत नहीं। मित्र ही मित्रों के काम आते हैं। एक तो आंखों में जलन और ऊपर से चिल्लाते-चिंघाडते हाथी का गला सूख गया। उसे तेज प्यास लगने लगी। अब उसे एक ही चीज की तलाश थी पानी। मेढक ने अपने बहुत से बंधु-बांधवों को इकट्ठा किया और उन्हें ले जाकर दूर बहुत बड़े गड्ढे के किनारे बैठकर टर्राने के लिए कहा। सारे मेढक टर्राने लगे, मेढक की टर्राहट सुनकर हाथी के कान खडे हो गए। वह यह जानता था कि मेढक जल स्त्रोत के निकट ही वास करते हैं, वह उसी दिशा में चल पडा। टर्राहट और तेज होती जा रही थी। प्यासा हाथी और तेज भागने लगा। जैसे ही हाथी गड्ढे के निकट पहुंचा, मेढकों ने पूरा जोर लगाकर टर्राना शुरु किया। हाथी आगे बढा और विशाल पत्थर की तरह गड्ढे में गिर पडा, जहां उसके प्राण पखेरु उडते देर न लगे। इस प्रकार उस अहंकार में डूबे हाथी का अंत हुआ।

*💐शिक्षा:-💐*

एकता में बल है और अहंकारी का देर/ सबेर अंत होता ही हैं!!

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31/01/2025

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*💐💐बड़ा दिल💐💐*

बात कुछ दिनों पूर्व की है,बाहर से किसी के मांगने की आवाज आई। सुबह से मांगने वालों का तांता सा लगा हुआ था तो पुनः बाहर जाने में थोड़ी झुंझलाहट सी महसूस हुई, लेकिन फिर आदत से मजबूर हो बाहर देखने गई।

एक श्याम वर्ण की दुबली पतली औरत खाने के लिए कुछ मांग रही थी। उसकी काया देख मैं उसके लिए कुछ खाने के लिए लेकर बाहर गई। साथ में एक 9-10 वर्ष के लड़के को देख मैंने उससे पूछा कि क्या यह तुम्हारा लड़का है? क्या यह पढ़ता है? तो उसने बड़े ही आत्मविश्वास से कहा कि दीदी यह लड़का मुझे मंदिर की सीढ़ियों पर मिला था।
वहां यह भीख मांगा करता था। मैं इसे अपने साथ घर ले आई और अब मैं ही इसकी देखभाल करती हूं। मैंने इसका दाखिला स्कूल में भी कराया है। इसका भाग्य बन जाए और मुझे क्या चाहिए।

मन ही मन उस महिला के प्रति सम्मान का भाव जगा। एक गरीब महिला जिसके पास स्वयं के लिए मुश्किल से कुछ होगा एक अनाथ बच्चे को पाल रही थी और हम लोग इतने सक्षम होकर भी इस तरह के कदम उठाने में झिझकते हैं। ऐसे में कभी-कभी लगता है कि जीवन में इतना आगे बढ़ कर भी क्या जीवन में कुछ अच्छा कर पाते हैं हम ? इस एक घटना ने मुझे काफी कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया।

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इसे शुतुरमुर्ग पक्षिओं की सबसे बड़ी जीवित प्रजातियों मे से है और यह किसी भी अन्य जीवित पक्षी प्रजाति की तुलना में सबसे ब...
31/01/2025

इसे
शुतुरमुर्ग पक्षिओं की सबसे बड़ी जीवित प्रजातियों मे से है और यह किसी भी अन्य जीवित पक्षी प्रजाति की तुलना में सबसे बड़े अंडे देता है। प्रायः शुतुरमुर्ग शाकाहारी होता है, लेकिन उसके आहार में अकशेरुकी भी शामिल होते हैं। यह खानाबदोश गुटों में रहता है जिसकी संख्या पाँच से पचास तक हो सकती है।

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Jamui
Patna
811312

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