17/10/2026
बेंगलुरु में CJP के 'तिरंगा मार्च' पर रोक: पुलिस ने बताया इसके पीछे का असली कारण
बेंगलुरु: कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और दिल्ली में पार्टी पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इसी कड़ी में बेंगलुरु के ऐतिहासिक टाउन हॉल से मैसूर बैंक सर्कल (क्विट इंडिया मेमोरियल) तक 'तिरंगा मार्च' निकालने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, शुरुआत में बेंगलुरु पुलिस ने कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था के नियमों का हवाला देते हुए इस मार्च को अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
पुलिस ने क्या बताया कारण?
बेंगलुरु पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, अनुमति न देने का प्राथमिक कारण जगह का चुनाव था। पुलिस ने कर्नाटक उच्च न्यायालय (High Court) के पुराने आदेश का हवाला दिया, जिसके तहत बेंगलुरु शहर में किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन, रैली या मार्च के लिए केवल फ्रीडम पार्क (Freedom Park) को ही आधिकारिक और निर्धारित स्थल घोषित किया गया है। टाउन हॉल या अन्य व्यस्त चौराहों पर इस तरह के सार्वजनिक जमावड़े से आम जनता को असुविधा और यातायात बाधित होने की आशंका थी।
बाद में मिली सशर्त अनुमति
आयोजकों (CJP, जागृत कर्नाटक और माई वोट, माई राइट) द्वारा इसे केवल एक शांतिपूर्ण मार्च बताए जाने के बाद, बेंगलुरु पुलिस ने अंततः कुछ कड़ी शर्तों के साथ सीमित अनुमति प्रदान की।
पुलिस द्वारा जारी अनुमति पत्र के अनुसार निम्नलिखित प्रतिबंध लगाए गए थे:
• मार्च के दौरान किसी भी राजनीतिक दल, समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ भड़काऊ या आपत्तिजनक नारे नहीं लगाए जाएंगे।
• प्रदर्शनकारी किसी भी तरह के विरोध वाले पोस्टर, बैनर या तख्तियां प्रदर्शित नहीं कर सकेंगे।
• यह मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा और सार्वजनिक या यातायात व्यवस्था में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।
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