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14/09/2026

*कल डेरा ब्यास मे हुए सवाल-जवाब*

*पहला प्रश्न — लड़का:*
*लड़के ने कहा, “बाबा जी, मुझे नामदान लिए बहुत समय हो गया है और मैं भजन-सिमरन भी कर रहा हूँ, लेकिन जैसी बात बननी चाहिए, वैसी बन नहीं रही। कुछ दिखाई नहीं देता। आप दया करें और अंदर से पूरी टोटी खोल दें, ताकि आपकी पूरी दया मिल जाए।”*

*बाबा जी का जवाब:*
*“बेटा, उनकी दया की कोई कमी नहीं है। बस हमें यह देखना है कि हमें जाना कहाँ है। यह मन की परख है। हमें इस परख में नहीं पड़ना चाहिए और अपना भजन-सिमरन करते रहना चाहिए।”*

*लड़का फिर बोला, “जी बाबा जी, लेकिन दया तो आपको ही करनी है, आप टूटी पूरी खोल दो।”*

*बाबा जी ने प्यार से कहा, “उन्होंने तो दया-मेहर की हुई है। अब हमें अपने आप पर खुद दया करनी है। बिना किसी परख के अपना भजन-सिमरन जारी रखना चाहिए।*

*दूसरा प्रश्न — लड़की:*
*लड़की ने कहा, “बाबा जी, आपका बहुत शुक्रिया कि आपने मुझे यह मौका दिया। मेरी इतनी औकात नहीं कि मैं आपसे कोई सवाल पूछ सकूँ। बस दया-मेहर बनाए रखना। बाबा जी, मेरे दो भाई हैं, जो मेरे साथ बहुत लड़ते हैं।”*

*बाबा जी का जवाब:*
*“कोई बात नहीं बेटा।* *भाई-बहन आपस में ऐसे ही लड़ते हैं। हमें इससे परेशान नहीं होना चाहिए। यही प्यार आगे चलकर, जब तुम बड़ी हो जाओगी, तो तुम्हें याद आएगा और तुम इसे याद करके खुश होगी। भाई-बहन का यह लड़ना भी उनका प्यार होता है।”*

*लड़की बोली, “जी बाबा जी, पर वह मुझे बहुत सताता है।”*

*बाबा जी बोले, “कोई बात नहीं बेटा।”*

*तीसरा प्रश्न — लड़का:*
*लड़के ने कहा, “बाबा जी, मैं बहुत खुश हूँ। मैंने आज यही माँगा था कि अगर हजूर जी के साथ आप भी आ जाएँ, तो बात बन जाए।”*

*बाबा जी मुस्कुराते हुए बोले, “अच्छा! तो कुछ और भी माँग लेते, वह भी मिल जाता।”*

*यह सुनकर संगत और हजूर जी भी मुस्कुराने लगे।*

*लड़का बोला, “बाबा जी, मुझे बहुत खुशी है कि आप आए हैं। बस दया-मेहर करना कि हम भजन-सिमरन कर सकें।”*

*चौथा प्रश्न — लड़की:*
*लड़की ने कहा, “बाबा जी, दया करना कि मैं पाठ-सिमरन पूरी तरह कर सकूँ।”*

*बाबा जी बोले, “नहीं बेटा, यह तुम्हें खुद करना पड़ेगा।”*

*लड़की बोली, “बाबा जी, मैं कोशिश तो करती हूँ, लेकिन मुझसे भजन-सिमरन नहीं होता। इसलिए आपको ही करवाना पड़ेगा।”*

*बाबा जी ने प्यार से समझाया, “मैंने करवाना है? तुम कहो कि मुझे खुद करना है, मैं खुद करूँगी। हम कभी खुद कुछ नहीं करेंगे? खाना तो हम अपने लिए खुद ही खाते हैं।”*

*लड़की बोली, “नहीं बाबा जी, मेरा बापू बहुत डाढ़ा है, वह करवाएगा।”*

*बाबा जी मुस्कुराकर बोले, “हाँ, यह बापू डाढ़ा है। यह ऐसे कुछ करके नहीं देगा, खुद ही करना पड़ेगा। गलत बाबे के हाथ आ गए हो तुम!”*

*यह सुनकर पूरी संगत हँसने लगी और हजूर जी के चेहरे पर भी हल्की मुस्कान आ गई।*

*पाँचवाँ प्रश्न — लड़की:*
*लड़की ने कहा, “बाबा जी, मैं बहुत भुलेखे में हूँ। मुझे समझ नहीं आता कि मेरे गुरु आप हैं या हजूर जी। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ और मुझे डर लगता है कि अगर आपने मुझे छोड़ दिया तो मैं कहाँ जाऊँगी?”*

*बाबा जी बोले, “अच्छा, ऐसा भी है? तुम सोच रही हो कि तुम हजूर की हो या बाबा जी की? मुझ पर किसकी मोहर लगी है, ऐसा भी होता है?”*

*लड़की बोली, “बाबा जी, प्लीज़ बता दो, नहीं तो मैं टेंशन में रहूँगी।”*

*बाबा जी ने कहा, “ऐसा तो कुछ नहीं होता। मेरे तो हजूर हैं, मैं तो हजूर का हूँ।”*

*लड़की बोली, “फिर बाबा जी, मैं भी हजूर की हूँ।”*

*बाबा जी बोले, “हाँ, हजूर के बने रहो।”*

*लड़की बोली, “नहीं बाबा जी, घूम-फिरकर तो मैं आपके पास ही आऊँगी।”*

*बाबा जी ने कहा, “अच्छा बेटा, भजन-सिमरन करो।”*

*छठा प्रश्न — लड़का:*
*लड़के ने कहा, “बाबा जी, मेरी मामी की लड़की की छत से गिरकर मौत हो गई थी। मामी इस गम में बहुत रोती हैं और उस बात को भूल नहीं पातीं। आप कुछ ऐसा बोल दीजिए कि वह ठीक हो जाएँ।”*

*बाबा जी का जवाब:*
*“बेटा, यह आवण-जावण का खेल है। यहाँ सभी का आना-जाना तय है। हमें यह सोचकर परेशान नहीं होना चाहिए। उस मालिक से जुड़ना चाहिए और भजन-सिमरन करना चाहिए।”*

*लड़का बोला, “बाबा जी, वह बहुत परेशान रहती हैं।”*

*बाबा जी ने कहा, “बेटा, आप उनको इतना प्यार दो कि वह उस गम को भूलकर आप में ही अपनी बेटी-बेटा देखने लगें।”*

*सातवाँ प्रश्न — लड़की:*
*लड़की ने कहा, “बाबा जी, हम आठ बहनें हैं और हमारी नानी बहुत परेशान रहती हैं। आप उनसे बोल दीजिए कि वह परेशान न हुआ करें। मैं एडवोकेट की पढ़ाई कर रही हूँ, दया करना कि मैं बन जाऊँ।”*

*बाबा जी बोले, “वकील क्यों, जज बनो! जज नहीं बनोगी? चलो, शुरुआत के लिए अच्छा है। और क्या हुआ अगर आठ बहनें हैं? बेटियाँ तो आजकल बेटों से बढ़कर हैं। बेटे तो अपनी बीवी की गोद में जाकर बैठ जाएँगे, बेटियाँ ही हैं जो माँ-बाप की सेवा और ख्याल रखेंगी। आजकल लड़का-लड़की सब बराबर हैं।”*

*लड़की बोली, “ठीक है बाबा जी, पर दया-मेहर करना कि हमें एक भाई दे दें।”*

*बाबा जी मुस्कुराकर बोले, “फिर से वही बात! बेटा, लड़का-लड़की सब बराबर हैं। ऐसा नहीं सोचना चाहिए। तुम खुद इतनी स्ट्रॉन्ग बनो।”*

*आठवाँ प्रश्न — लड़का:
लड़के ने कहा, “बाबा जी, मुझे गुस्सा बहुत आता है।”*

*बाबा जी बोले, “गुस्सा आता है? किस पर निकालते हो, बीवी पर?”*

*लड़का चुप हो गया और संगत हँसने लगी।*

*लड़का बोला, “जी बाबा जी, वाइफ पर आता है।”*

*बाबा जी ने समझाया, “भाई, उसकी कदर करो। वह तुम्हें प्यार देने के लिए भेजी गई है। बीवियों को प्यार से रखना चाहिए। अगर अगले जन्म में तुम घरवाली बनोगे और वह तुम्हारा घरवाला बनेगा, तो वह भी तुम्हें ऐसे ही मारे-पीटेगा। यह कर्मों का खेल है, घूम-फिरकर वापस आएगा। इसलिए सोच-समझकर बर्ताव करो और खुश रखो। मारना-पीटना नहीं चाहिए। समझे कुछ?”*

*लड़का बोला, “ठीक है बाबा जी।”*

*नौवाँ प्रश्न — लड़का:*
*लड़के ने कहा, “बाबा जी, मेरा ध्यान भजन-सिमरन में टिकता नहीं है। मन इधर-उधर भागता रहता है।”*

*बाबा जी बोले, “अच्छा! किधर जाता है ध्यान? तुम्हें सुंदर भी तो बहुत बनाया है!”*

*बाबा जी और हजूर जी मुस्कुराने लगे।*

*बाबा जी ने हँसते हुए कहा, “सोहणी कुड़ी देखी नहीं कि ध्यान उधर भागा!”*

*यह सुनकर पूरी संगत और हजूर जी भी हँसने लगे।*

*दसवाँ प्रश्न — लड़की:*
*लड़की ने कहा, “बाबा जी, मुझसे भजन-सिमरन तो नहीं होता। बस सेवा करते-करते ही आप मुझे सचखंड ले जाना।”*

*बाबा जी ने कहा, “अरे बेटा, अगर सभी भजन-सिमरन नहीं करेंगे, तो सारा बोझ मेरे ऊपर ही आ जाएगा।”*

*बाबा जी की यह बात सुनकर संगत थोड़ी गंभीर और भावुक हो गई।*

Hazur g..🙏
31/08/2026

Hazur g..🙏

04/06/2026

*सभी इंचार्ज से अनुरोध है कि कृपया इस संदेश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और इसे अपने-अपने ग्रुप में शेयर करें।*

*जब बाबा जी/हुज़ूर जी डेरा ब्यास में उपस्थित हों, तो पंडाल के अंदर कोई भी सामान ले जाने की अनुमति नहीं है; इसमें बोतलें, पर्स, मोबाइल पाउच, लिफाफे, बैग या कोई भी अन्य निजी सामान शामिल है।*

*यदि पानी की आवश्यकता हो, तो केवल एक छोटी पारदर्शी/सफेद बोतल ले जाने की अनुमति है। हरी बोतलें ले जाने की अनुमति नहीं है।*

*कृपया यह सुनिश्चित करें कि सभी सेवादारों को इस बारे में सूचित कर दिया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।*

27/04/2026

*Q -* बाबा जी, आज मैं बहुत खुश हूँ।। आपने मेरी पर्ची निकाल दी।।

*Ans -* साथ में कहती है खुश हूँ, साथ में रोए जा रही है।।

*Girl -* बाबा जी, आपको देख कर रोना आ जाता है।।

*Baba ji -* क्यों, मेरी शक्ल इतनी बुरी है।। हुज़ूर को देख कर क्या आता है।।

*Ans -* नहीं बाबा जी, आप बहुत सुंदर हो।। हँसना।।

*Girl -* बाबा जी, सारी संगत के ऊपर और मेरे परिवार के ऊपर दया मेहर बनाए रखना।।

*Baba ji -* बेटा, मैं जो करूँगा उससे तुझे रोना आएगा।। अब जो करेंगे हुज़ूर करेंगे।।

*Girl -* नहीं बाबा जी, आपने भी करना है, आप तो मेरे बापू हो।।

*Ans -* अगर मैं बापू हूँ तो हुज़ूर क्या हैं, भाई।।

*Girl -* नहीं बाबा जी, उनको पहले मैं चाचू कहती थी, अब मैं भाई कहती हूँ।।

*Baba ji -* मैं तो तेरे बच्चों जैसा हूँ, मुझे इतना बूढ़ा ना बना।।

*Girl -* बाबा जी, आप जलालाबाद सेंटर आ जाते हो, हमारे सेंटर नहीं आते।।

*Baba ji -* अब बाबे क्लोन कर लिए हैं, एक आया करेगा।।

*Girl -* नहीं बाबा जी, दोनों आना।।

*Baba ji -* नहीं, दोनों नहीं आ सकते, लड़ाई हो जाएगी। एक म्यान में दो तलवारें नहीं आ सकतीं। तुम्हें भी दुविधा हो जाएगी कि हुज़ूर की तरफ देखें या बाबे की तरफ।

*Girl -* बाबा जी, माँ की बहुत याद आती है।।

*Ans -* बेटा, कोई भी रिश्ता ऐसा नहीं है जो सदा के लिए रह सके।। हम तो हुक्म में रहें।।

*Girl -* बाबा जी, मैं जो भी बनी थी अपनी माँ की वजह से बनी थी, और अब जो कुछ भी मैंने पाया, मैं किसे दिखाऊँ, मेरे पास कोई नहीं है।।

*Baba ji -* बेटा, मावा ठंडीया छाँवा होती हैं।। पर माँ भी यही चाहती थी कि मेरी बेटी हमेशा खुश रहे।। तुम फिक्र करोगी, तो तुम्हारी सेहत खराब होगी।।

*Girl -* बाबा जी, आपका शुक्रिया। माँ के जाने के बाद आपने मुझे एक बेटी दी।। मुझे उसमें मेरी माँ दिखती है।।

*Baba ji -* बेटा, औरत का तो किसी भी स्वरूप में होना मान्य है।।

*Girl -* बाबा जी, मैं अपनी चिंताएँ यहीं छोड़ जाऊँ।।

*Baba ji -* तुझे कहा किसने है अपना बोझ साथ लेकर चलने को।

*Girl -* बाबा जी, आज के ज़माने को देख कर शादी से बहुत डर लगता है, जिस तरह जो कुछ भी अपने आस-पास हो रहा है।।

*Ans -* बेटा, सारा कुछ मर्द के हाथ में होता है। शुरू से औरत को अपने हाथ में रखोगे तो।। सारा कुछ सही होगा।।

आजकल लड़के गुलामी करते हैं।। बाद में पछताना पड़ता है।। हम बैलेंस रखें|

*🌸 जरूरी सूचना – नाम दान कार्यक्रम 🌸**नाम दान के अभिलाषी जिनका रजिस्ट्रेशन  22 & 23&24 अप्रैल  को डेरा ब्यास में हुआ है,...
25/04/2026

*🌸 जरूरी सूचना – नाम दान कार्यक्रम 🌸*

*नाम दान के अभिलाषी जिनका रजिस्ट्रेशन 22 & 23&24 अप्रैल को डेरा ब्यास में हुआ है, उन्हें नाम दान की बख्शीश 27 अप्रैल सोमवार को की जाएगी जी।*

*संगत से विनम्र बिनती है कि नाम दान हेतु सभी अभिलाषी नया नामदान हॉल में सुबह 7:00 बजे से 8 बजे तक अवश्य पहुंच जाएं जी।*

*संगत नामदान के लिए आते समय आधार कार्ड और नामदान की पर्ची साथ जरूर लेकर आए जी और नाश्ता हल्का फुल्का करके आए जी कपड़े भी इस तरह के पहन कर आए जिससे बैठने में आसानी हो*

15/04/2026

*आज की मीटिंग श्री गुरमिंदर सिंह जी, ज़ोनल सेक्रेटरी द्वारा आयोजित की गई। मीटिंग का एक छोटा सा अंश साझा किया जा रहा है।*

*सेवा बहुत अनमोल है। एक बार यह अवसर हाथ से निकल जाए, तब इसकी असली कीमत समझ आती है।*

*सेवा मिलना कोई छोटी बात नहीं है। पैसा दोबारा कमाया जा सकता है, लेकिन सेवा का अवसर एक बार चला जाए तो उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।*

*सेवा को कभी गिनती में नहीं लेना चाहिए। जहाँ प्रेम होता है, वहाँ गिनती नहीं होती। अगर आप सेवा नहीं करेंगे तो कोई और कर लेगा। हम स्वयं सेवा लेने के लिए आगे आए थे। सेवा करके देखिए — दुनियादारी बड़ी लगती है या सेवा।*

*जब राम जी को श्रीलंका जाना था, तब बंदर से लेकर छोटी गिलहरी तक सबने मिलकर पुल बनाने में योगदान दिया। हर किसी ने अपना छोटा सा हिस्सा निभाया। उसी प्रकार हमें भी अपना थोड़ा सा योगदान देना है, बाकी मालिक संभाल लेंगे।*

*एक मालिक पर ही विश्वास रखो। जैसे अर्जुन ने केवल चिड़िया की आँख देखी, वैसे ही हमें भी केवल गुरु का ध्यान रखना है। सेक्रेटरी या किसी और को मन में नहीं रखना चाहिए।*

*क्या इस रवैये से बाबा जी खुश होंगे? निंदा और चुगली का कोई लाभ नहीं। हम यहाँ अपने कर्म काटने और मालिक को याद करने आते हैं।*

*यह पूरा मार्ग प्रेम का मार्ग है; यहाँ कोई गिनती नहीं होती। सेवा तो हुकुम की होती है — जो कहा जाए, प्रेम से कर लिया जाए।*

*अगर आप सेवा करने नहीं आएँगे, तो कोई और आकर इस अवसर को ले जाएगा।*

*जो भी सेवदार सेवा प्रसाद चाहते हैं, उनके लिए 16 दिन की हाज़िरी आवश्यक होगी।*

*आधा दिन आएँ या पूरा दिन, लेकिन बिना याद दिलाए स्वयं आएँ। यह आपके पिता का घर है। क्या हम महीने में 2 दिन भी नहीं आ सकते?*

*परमार्थ इतना सस्ता नहीं है। अगर सेवा के बदले कुछ माँग लिया, तो सेवा शून्य हो जाती है। फिर वह व्यापार बन जाता है।*

*जितनी सेवा बन सके, प्रेम से करें। चाहे एक ईंट ही उठाएँ, लेकिन आएँ ज़रूर।*

*लंगर और अन्य सभी व्यवस्थाएँ उपलब्ध होंगी। बस खुश चेहरे के साथ आएँ। यह आपका अपना घर है।*

*यह ज़िंदगी मिली है — इसका पूरा लाभ उठाइए।*

*पहले मालिक का काम, फिर दूसरा काम। 🙏*

Radha Swami ji Baba Gurvinder Singh Dhillon                         #ਸਤਿਸੰਗ
10/04/2026

Radha Swami ji Baba Gurvinder Singh Dhillon

#ਸਤਿਸੰਗ

08/04/2026

*Next Master Satsang Program 10 & 11 April 2026 At Auckland (New Zealand)..✍🏻*

07/04/2026

*संगत से बिनती की जाती है कि जब हम बाबा जी और हजूर जी के दर्शन करने ब्यास या मेजर सेंटर जाते हैं जैसे जम्मू, परोर, सोलन, दिल्ली, सिकंदरपुर, तो हमारा ध्यान सिर्फ सत्संग और दर्शन की तरफ होना चाहिए*

*हम सबसे पहले फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी करते हैं जब बाबा जी/हजूर जी दर्शन देते हैं*

*अगर दर्शन समय हम वीडियोग्राफी नहीं कर पाते तो हम सत्संग घर की वीडियोग्राफी करने लग जाते हैं और सोशल मीडिया पर डालते हैं मैं हाथ जोड़ कर बिनती करता हूं कि हम हुकम में रहे और फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी ना करे जी*

*जैसा सत्संग प्रोग्राम हो जाता है हम संगत की वीडियोग्राफी करके सोशल मीडिया पर डालते हैं जैसे कैंटीन एरिया, पंडाल एरिया, लंगर एरिया और पार्किंग एरिया*

*मैं दोनों हाथ जोड़के बिनती करता हु की वीडियोग्राफी ना करे जी*

06/04/2026

ਰਾਧਾ ਸੁਆਮੀ ਜੀ
ਸੰਗਤ ਨੂੰ ਬੇਨਤੀ ਕੀਤੀ ਜਾਦੀ ਹੈ ਕਿ ਸਤਿਸੰਗ ਘਰ ਐਤਵਾਰ ਦੇ ਸਤਿਸੰਗ ਦੇ ਸਮੇ ਵਿਚ ਤਬਦੀਲੀ ਹੋ ਗਈ ਹੈ ਜੀ।

*ਐਤਵਾਰ ਦੇ ਸਤਿਸੰਗ ਦਾ ਸਮਾਂ : ਸਵੇਰੇ 09:00 ਵਜੇ*

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