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Rooh-e-Smriti � दर्द से लिखी इबादत
� टूटी रूह से निकला सुकून
� शब्द नहीं, एहसास हैं यहाँ
� राधे राधे �

10/29/2026
10/29/2026

श्रीकृष्ण स्तुति ॥
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥ १६ ॥

भावार्थ
भगवान श्रीकृष्ण, जो वासुदेव के पुत्र, परमात्मा और गोविंद हैं, उन प्रभु को बार-बार नमन है, जो उनकी शरण में आने वाले भक्तों के दुःख और कष्टों को दूर करते हैं। 🙏🏻

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10/28/2026

कुछ बातें दिल में रह जाने दो… 🌙❤️

हर बात ज़ुबाँ पर लाना ज़रूरी तो नहीं, हर दर्द दुनिया को बताना ज़रूरी तो नहीं।

कुछ रिश्ते ख़ामोशी में भी साँस लेते हैं, हर रिश्ते को नाम देना ज़रूरी तो नहीं।

जो समझ सके ख़ामोशी, वही अपना होता है, हर किसी को अपना बनाना ज़रूरी तो नहीं।

ज़िंदगी बहुत ख़ूबसूरत है, ऐ दिल मेरे, किसी के लिए हर रोज़ ख़ुद को मिटाना ज़रूरी तो नहीं। 🌹

— रूह-ए-स्मृति ✍🏻
कमल की तरह खिलना सीखो 🌸 | मन की शांति ही असली जीत है ❤️

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10/27/2026

“जीवन में हर परिस्थिति का उत्तर देना ज़रूरी नहीं होता, कुछ बातों को समय पर छोड़ देना ही समझदारी है। क्योंकि जो मनुष्य भीतर से शांत रहना सीख लेता है, उसकी मुस्कान के आगे बड़ी से बड़ी परेशानी भी छोटी लगने लगती है।” 🙏🏻

मन की शांति ही असली ताकत है 🌸 | सुंदर सुविचार

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10/27/2026

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 12, श्लोक 16

अनपेक्षः शुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथः। सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्तः स मे प्रियः॥ १२.१६॥

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—
जो किसी सांसारिक वस्तु या फल की अपेक्षा से मुक्त है, जो भीतर और बाहर से पवित्र है, अपने कर्तव्यों को कुशलतापूर्वक निभाता है, पक्षपात से दूर रहता है और मानसिक व्याकुलता से मुक्त रहता है; जो स्वार्थपूर्ण इच्छाओं से प्रेरित होकर कर्मों में प्रवृत्त होने का त्याग करता है, ऐसा मेरा भक्त मुझे प्रिय है।

भगवान श्रीकृष्ण श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक में अपने प्रिय भक्त के गुण बताते हैं। सच्ची भक्ति, पवित्रता, कुशलता और निःस्वार्थ भाव का संदेश समझें।

राधे-राधे 🙏🏻 | रूह-ए-स्मृति ✍🏻

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10/26/2026

ज़िंदगी में हर किसी को खुश करते-करते,
कहीं खुद को खो मत देना।
दुनिया की सबसे बड़ी जीत यही है,
कि तुम अपने मन की शांति न खो देना।

कमल कीचड़ में रहकर भी खिलना नहीं भूलता,
अपनी सुंदरता और सुगंध नहीं खोता।
वैसे ही संसार की उलझनों में रहकर,
तुम भी अपनी अच्छाई और सुकून मत खोना। 🌸🙏🏻

— रूह-ए-स्मृति ✍🏻

कमल की तरह खिलना सीखो 🌸 | मन की शांति ही असली जीत है ❤️

संसार की उलझनों में रहकर भी कमल की तरह अपनी सुंदरता, अच्छाई और मन की शांति बनाए रखिए। हर किसी को खुश करते-करते खुद को मत खोइए। 🌸✨

खुद से प्रेम करें, मुस्कुराते रहें और अपने मन का सुकून सँभालकर रखें।

राधे-राधे 🙏🏻
— रूह-ए-स्मृति ✍🏻

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10/26/2026

श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 12, श्लोक 15

संस्कृत श्लोक:

यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः।
हर्षामर्षभयोद्वेगैर्मुक्तो यः स च मे प्रियः॥ १२.१५॥

भावार्थ:

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—जिस व्यक्ति से किसी को कष्ट या भय नहीं होता और जो स्वयं भी दूसरों के कारण विचलित नहीं होता, जो अत्यधिक हर्ष, ईर्ष्या, भय और मानसिक उद्वेग से मुक्त रहता है, वह मुझे प्रिय है।

आज की सीख:

सच्ची शांति केवल अकेले शांत बैठने में नहीं, बल्कि ऐसा इंसान बनने में है जिसके व्यवहार से दूसरों को ठेस न पहुँचे और जो दूसरों के व्यवहार के बीच भी अपना विवेक न खोए।

राधे-राधे 🙏🏻

श्रीकृष्ण की वाणी | सच्चे भक्त की पहचान 🦚

विवरण: श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य संदेश — सच्चा भक्त वही है जो सुख-दुःख में समभाव रखता है और हर परिस्थिति में अपना विवेक बनाए रखता है। 🙏🏻

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10/25/2026

🌕 शरद पूर्णिमा: चाँदनी में घुला प्रेम, मन में खिला विश्वास 🌸

शरद पूर्णिमा की पावन चाँदनी हमें सिखाती है कि जीवन कितना भी उलझा हुआ क्यों न हो, मन में प्रेम और विश्वास हो तो अँधेरे भी खूबसूरत लगने लगते हैं। ✨

आज की रात राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और महारास की स्मृति से जुड़ी है। कहते हैं, जब कान्हा की बाँसुरी गूँजती है, तो वृंदावन की हवाएँ भी प्रेम की भाषा बोलने लगती हैं। 🦚💙

जिस तरह चाँद अपनी शीतल चाँदनी से पूरी धरती को रोशन करता है, उसी तरह तुम भी अपने प्रेम, अपने अच्छे विचारों और अपने व्यवहार से किसी के जीवन में उजाला बनो।

क्योंकि सुंदरता चेहरे में नहीं, उस प्रेम में होती है जो किसी के मन को सुकून दे जाए। ❤️

इस शरद पूर्णिमा पर कान्हा से बस इतनी-सी प्रार्थना है—हमारे मन से अहंकार दूर हो, हृदय में प्रेम बना रहे और जीवन में भक्ति की चाँदनी कभी कम न हो। 🙏🏻🌕

आप सभी को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

राधे-राधे 🙏🏻🌸

— रूह-ए-स्मृति ✍🏻

शरदपूर्णिम�

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